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झूठ के साथ, एक नये समाज का निर्माण……

आजकल हमारे समाज के बीच, एक नये समाज के निर्माण का कार्य चल रहा है! यह समाज परिकल्पना से परिपूर्ण है! तथा इस समाज का स्थापना कार्य, समाज मे रहने वाले व्यक्तियों की व्यक्तिगत राय से प्रारंभ होता है! जो कि समाज में बदलाव के लिए अवश्यक है! परन्तु इसके साथ हमे यह सोचने की आवश्यकता भी है कि हम जिस समाज का निर्माण कर रहे हैं? क्या वो हमारी सामाजिकता के लिए उपयोगी है?
आजकल इस नये समाज का निर्माण कार्य सोशल मीडिया के द्वारा अत्यधिक चर्चे में है! तथा यह नया समाज, वास्तविकता से काफी दूरी पर है क्योंकि की इसका निर्माण सोशल मीडिया की पृष्ठभूमि पर हम जैसे लोगों के द्वारा ही किया जा रहा है!
यह कैसा समाज है! जहां, किसी व्यक्ति का एक्सिडेंट या अन्य घटना होने पर उसको बचाने की बजाय, उस घटनास्थल का विडियो बनाना जरूरी हो गया है! ताकि इस नये समाज से जुड़े लोगों को समय व्यतीत करने के लिए कुछ नया चर्चा का विषय मिल सके!
यह कैसा समाज है! जहां, दिखावे के लिए महिला सशक्तीकरण व महिलाओं की सुरक्षा के बारे में बड़े बड़े बोल बोले जाते हैं! परन्तु वास्तविकता हमारे सामने है!
यह कैसा समाज है! जहां, किसी पीड़ित महिला व लड़की को न्याय की बजाय उस विषय पर 5-6 दिन चर्चा करने के बाद उसे भुलाकर, चर्चा के लिए किसी अन्य घटना का इंतज़ार किया जाता है!
आज के समय में सच्चाई को जानकर भी झूट के साथ मिलकर एक नये समाज का निर्माण किया जा रहा है! जिसमें कहीं न कहीं हम सब शामिल हैं!……