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Showing posts from July, 2017

माना कि मुझ पर हक तेरा भी है, ये जिन्दगी....

माना कि मुझ पर हक तेरा है, ये जिन्दगी
लेकिन , तु खुद पर इतना गुरूर न कर
तूने बना लिये अपने उसूल तो क्या हुआ
इस जिन्दगी के कुछ पलों पर, तो हक मेरा भी है

वो वक्त था उन लम्हों का, हमारा तो बस नाम....

वो वक्त था उन लम्हों का,  हमारा तो बस नाम था
आया था बनकर पैगाम, वो हमारे ही नाम था
कर गये ऐसी गुस्ताखी, जैसे हमारा ही काम था
हमें कहां पता था, कि वो पैगाम उन लम्हों के नाम था