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Digitalization...For the prosperous nation

Digitalization...For the prosperous nation


This book is based on the theme of “Digital India” that was launched on 1 July 2015 by Government of India.​
Digitalization...For the prosperous nation This book is based on the theme of “Digital India” that was launched on 1 July 2015 by Government of India.​ Digital India is a campaign launched by the Government of India to ensure that Government services are made available to citizens electronically by improving online infrastructure, increasing Internet connectivity or by making the country digitally empowered in the field of technology.
Autho wrote this book to convey my opinion about Digitalization (Digital India) and how to contribute in the development of nation.

Digitalization...For the prosperous nation (Book)
AuthorAtul Kumar
ThemeDigital India
LanguageHindi
PublisherSelf-Published (by- MHRD, India)
GenreSelf-Help
     Publication Date      
  • April 2017
         ISBN                  978-93-526-8355-0

Appreciation & Awards

1. Appreciation latter given by Ministry of information and technology, India (Digital India) 
2. Runner up of Young Innovation Award 2017

Available On

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Wo pagli si diwani si...

वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है...
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है, 
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है, 
झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है, 
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।

आइना है उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है, 
वो है पागल, जो दिल को झुटा बतलाती है, 
लगती है प्यारी, जब खुद ही वो शर्माती है, 
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।

कहता है जमाना कि, वो तो पागल है, 
वे-वजह, जब-जब वो मुस्कुराती है, 
जमाने को क्या पता, कि वो मुझसे क्यों शर्माती है, 
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।

जब आँखें मेरी मदहोश चेहरे से उसके, मिलकर आती हैं, 
काश वो समझ पाती कि, कितना मुझको वो तड़पाती हैं, 
खो गया गया हूँ मुझसे मै, न नींद मुझको अब आती है, 
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।....


                                                                 - अतुल कुमार                                             


Taaruf (तआरुफ़)

Ta'aruf
Ta'aruf (तआरुफ़) is a beautiful poetry collection, it also contain a short story about love. This Book is written by Atul Kumar (Author) and Author Amol and this is India’s first poetry collection, in which a Student & a Professor penned different shades of emotions together about love and life journey.
Ta'aruf (Book) AuthorAtul Kumar, Author AmolThemePoetryLanguageHindiPublisherBlue Rose PublisherGenrePoetry

Mein-Wo aur Metro

मैं-वो और मेट्रो...

मैं-वो और मेट्रो...
नबंवर महीने की जयपुर की वो गुनगुनाती और गुलाबी सी सुबह थी। और सुबह के लगभग 8 बज चुके थे। और अलार्म बार बार चीखकर अपना वक़्त बता रहा था। एक लड़का तकरीवन 24 -25 साल का, चेहरे पर एक अलग सी कशिश और ख़ामोशी लिए और वो लड़का जल्दी जल्दी अपने कॉलेज जाने के लिए तैयार होता है। और घर के नजदीक मेट्रो स्टेशन से, सुबह के 8:40 की मेट्रो पकड़ता है। काफी भीड़ और रोजमर्रा की तरह मेट्रो में, ऑफिस और कॉलेज जाने वालों की भीड़ में उसे भी जगह मिल जाती है। लड़के के बैग में हमेशा एक स्पाइरल डायरी हुआ करती थी। और इसी प्रकार एक छोटा सा सफर शुरू हो जाता है।, ...रोजाना की तरह रागिनी भी उसी रास्ते से मेट्रो पकड़ती है। जिसके चंचलपन, कॉलेज गोइंग गर्ल कि बजह से कॉलेज और घर में लोगों से घिरी रहती थी। उसकी आँखों में एक अजीब समुन्दर सी गहराई, शायद उसके शब्द बोल ही नहीं पाते होंगे। आँखें ही दिल की जुवां होंगी। ...हमेशा की तरह मेट्रो के अंदर जाने के बाद सीट के लिए जदो-जहद। और लड़के का सामना इत्तेफाकन रोज रागिनी से हुआ करता था। शायद ऊपर वाले को यही मजूर था। वो लड़का रागिनी की आँखों में देखता, और अप…