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देश बदल रहा है। मानवता भी?

देश बदल रहा है। मानवता भी?


हम सभी को बचपन से पढ़ाया व सिखाया गया है। कि परिवर्तन प्रकृति का एक नियम है। जो कि हमारे जीवन मे बहुत महत्व रखता है। फिर चाहे वो परिवर्तन हमारे व्यक्तिगत जीवन का हो या फिर हमारे समाज से संबंधित हो। सबका अपना एक महत्व है। जो कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमे प्रभावित जरूर करता है। साथ ही हमारे जीवन मे भी प्रभाव डालता है।
यदि इतिहास से वर्तमान तक देखा जाए तो समाज में व हमारे व्यक्तिगत जीवन में बहुत सारे बदलाव आए है। जिसमे से कुछ हमारे लिए अच्छे हैं तो कुछ चुनोतियाँ बनकर हमारे सामने भी खड़े हैं। और हमसे जबाब मांग रहे है। क्यों कि कहीं न कहीं हम ही उन बदलाब के लिये जिम्मेदार हैं। 
यदि वर्तमान में हमारे भारत देश की बात करें तो बहुत कुछ बदल रहा है। और बहुत कुछ बदल जा चुका है। जिसके परिणाम भलीभाँति, हम अपने आसपास और समाज में देख रहे हैं। ऐसे ही कुछ बदलाव देखकर खुशी होती है। तो वहीं कुछ दुःखद भी हैं। जो कि चुनौती बनकर हमारे सामने खड़े हैं। और जबाब मांग रहे हैं। जिनमे जातिवाद, धर्म, मानवता, मानसिकता इत्यादि शामिल हैं।
आइये ऐसे ही कुछ उदाहरणो से मिलते हैं। और गलतियां …

Digitalization ke daur me Digital Loktantra kyun nahi?

डिजिटलाईजेशन के दौर में “डिजिटल लोकतंत्र” क्यों नहीं?
भारत दुनिया का सातवा (क्षेत्रफल में) और दूसरा (जनसंख्या में) सबसे बड़ा देश है। भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओ में से एक है, फिर भी ये एक युवा राष्ट्र है। अठारहवीं सदी के मध्य में यूरोपीय शक्तियों द्वारा अपने उपनिवेश की स्थापना तक इसके बहुत से इतिहास मुग़ल और राजपूत के अधीन में रहे हैं। 1947 की आजादी के बाद मतदाताओं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इसके राष्ट्रवादी के आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व के तहत बनाया गया था। संसद का चुनाव हर 5 साल में एक बार आयोजित किया जाता है। वर्तमान में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मुखिया है। लोकतंत्र सरकार की एक प्रणाली है जो नागरिको को वोट देने और अपनी पसंद की सरकार का चुनाव करने की अनुमति देती है। आजकल राजनीतिक पार्टियों का चुनाव के बाद वोटिंग मशीन पर सवाल उठाना मानो बहुत ही आसान हो गया है। और फिर हो भी क्यों न भारत एक ऐसा देश है। जिसमे देश की प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है।  परन्तु यदि हम डिजिटल भारत को सफलतापूर्वक आगे लेकर जाना चाहते हैं। तो हमे प्रत्येक स्तर…

Digitalization ke daur me Digital Loktantra kyun nahi?

डिजिटलाईजेशन के दौर में “डिजिटल लोकतंत्र” क्यों नहीं?
भारत दुनिया का सातवा (क्षेत्रफल में) और दूसरा (जनसंख्या में) सबसे बड़ा देश है। भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओ में से एक है, फिर भी ये एक युवा राष्ट्र है। अठारहवीं सदी के मध्य में यूरोपीय शक्तियों द्वारा अपने उपनिवेश की स्थापना तक इसके बहुत से इतिहास मुग़ल और राजपूत के अधीन में रहे हैं। 1947 की आजादी के बाद मतदाताओं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इसके राष्ट्रवादी के आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व के तहत बनाया गया था। संसद का चुनाव हर 5 साल में एक बार आयोजित किया जाता है। वर्तमान में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मुखिया है। लोकतंत्र सरकार की एक प्रणाली है जो नागरिको को वोट देने और अपनी पसंद की सरकार का चुनाव करने की अनुमति देती है। आजकल राजनीतिक पार्टियों का चुनाव के बाद वोटिंग मशीन पर सवाल उठाना मानो बहुत ही आसान हो गया है। और फिर हो भी क्यों न भारत एक ऐसा देश है। जिसमे देश की प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है।  परन्तु यदि हम डिजिटल भारत को सफलतापूर्वक आगे लेकर जाना चाहते हैं। तो हमे प्रत्येक स्तर…